जल और स्वच्छता प्रबंधन की नई पहल: पुनर्गठित हुआ MP जल निगम, 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा को भी मिली मंजूरी
मध्य प्रदेश में लोगों के स्वास्थ्य और बेहतर स्वच्छता प्रबंधन के लिए सरकार ने जल निगम का पुनर्गठन कर इसे 'म.प्र. जल एवं स्वच्छता निगम' का नाम दे दिया है।
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स्वच्छता और जल प्रबंधन के लिए समत्व भवन में उच्च स्तरीय बैठक
मध्य प्रदेश में स्वच्छ पेयजल और बेहतर सैनिटेशन (स्वच्छता) व्यवस्थाओं के प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के संचालक मण्डल की इस 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। मैनेजमेंट की प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री ने जल निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के संचालक मण्डल प्रतिवेदन तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखों का विधिवत अनुमोदन किया।
'म.प्र. जल एवं स्वच्छता निगम' करेगा हेल्थ और सैनिटेशन पर काम
राज्य में जल जनित बीमारियों को रोकने और स्वच्छता प्रबंधन को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित को पुनर्गठित कर मध्यप्रदेश जल एवं स्वच्छता निगम बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव पर कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम अब अपने इस नए नाम और नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश में जल विकास एवं स्वच्छता प्रबंधन में बिल्कुल नए लक्ष्यों के साथ काम करेगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा का मैनेजमेंट
ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैठक में कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। इस परियोजना के लिए बनाई जाने वाली कंपनी में मध्यप्रदेश जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए एमडी को अधिकृत कर दिया गया है। इसके अलावा, परियोजना कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में जल निगम की 26 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी सुरक्षित रखने को भी मंजूरी मिल गई है।
57 करोड़ का बजट आवंटन और सुमित बोस की वापसी
प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करते हुए मुख्यमंत्री ने म.प्र. जल निगम के इक्विटी शेयरों का नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण मंजूर किया। साथ ही निगम द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए 57 करोड़ रुपए के बजट अनुमान को भी हरी झंडी दे दी। इसके अलावा, प्रबंधन को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने संचालक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुन: नियुक्ति का भी अनुमोदन किया।
कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर सीमा 5 से 25 करोड़ की गई
स्वास्थ्य और जल परियोजनाओं के एक्जीक्यूशन में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा मैनेजमेंट फैसला लिया। प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जीक्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार, म.प्र. जल निगम के एमडी की टेंडर मंजूरी की वित्तीय सीमा को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर सीधे 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया गया।
स्वास्थ्य और पीएचई विभाग के आला अधिकारी रहे मौजूद
बेहतर समन्वय और मैनेजमेंट के लिए इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके उपस्थित रहीं। उनके साथ मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव पीएचई सचिन सिन्हा, प्रमुख सचिव पीएचई मनीष सिंह, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव और मध्यप्रदेश जल निगम के प्रबंध संचालक वीएस चौधरी कोलसानी सहित संचालक मंडल के सदस्य मौजूद रहे।

